जो जीता गया था आतंकियों के दंश से ज़िंदगी की जंग, कोरोना से गया हार

वाराणसी। जिला एवं सत्र न्यायलय वाराणसी में जब 23 नवम्बर 2007 को बम ब्लास्ट हुआ तो उस समय कई वरिष्ठ अधिवक्ता घायल हुए थे। उन्ही में से गंभीर रूप से घायल हुए अधिवक्ता प्रमोद श्रीवास्तव भी थे। आतंकियों के इस दंश को झेलकर ज़िंदगी जंग जीतने वाले अधिवक्ता मौजूदा समय में फैली कोरोना महामारी के खिलाफ ज़िंदगी की जंग हार गए हैं। कोविड पॉज़िटिव अधिवक्ता की कोरोना से मौत हो गयी।

इस सूचना के बाद कचहरी परिसर में हर कोई स्तब्ध था कि आतंकियों के दंश से जंग जितने वाला कोरोना से जंग कैसे हार गया। मंगलवार को सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के प्रस्ताव के बाद कचहरी मे अधिवक्ता शोकाकुल रहे और न्यायिक कार्य से विरत रहे।

इस सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी दिलिप सिंह ने बताया कि 23 नवम्बर 2007 को जब दिवानी कचहरी मे भयानक बम ब्लास्ट हुआ तो प्रमोद श्रीवास्तव उस ब्लास्ट मे बुरी तरीके.से घायल हो गये थे। बुरी तरह घायल हुए अधिवक्ता प्रमोद ने उस वक़्त जब शासन के लोग उन्हे पचास हजार रुपया सहायता राशि के तौर पर देने पंहुचे तो तो उन्होने बहुत ही विनम्रता से इंकार कर दिया, कहा मेरी जान बच गयी यही बहुत है आप इस पैसे को किसी और जरूरतमंद को दीजिएगा।

अधिवक्ता दिलीप सिंह ने बताया कि उनकी इस उदारता और हिम्मत के किस्से अधिवक्ताओं में अक्सर हुआ करते थे, पर अफसोस ऐसी सोच रखने वाले व्यक्ति को करोना ने हमसे छिन लिया।

इसके अलावा बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानन्द राय व मृतक के भाई सुबोध श्रीवास्तव ने बीएचयू अपस्ताल प्रशासन पर इलाज मे लापरवाही का आरोप लगाते हुये प्रमोद श्रीवास्तव के मौत की जांच करने की मांग के साथ बीएचयू के मेडिकल सुपरिन्टेन्डेन्ट और वीसी के स्थानान्तरण की मांग की है।