नाग पंचमी पर भक्तों पर बरसेगा सर्प देवता का आशीर्वाद, जानिये क्यों है इस पर्व का विशेष महत्व

वाराणसी। आज के दिन पूरे देश में नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। सभी शिव मंदिरों और नाग मंदिरों में नाग देवता की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। नाग पंचमी के दिन नागों के 12 प्रकारों की पूजा होती है। नाग पंचमी का पर्व हर वर्ष श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस खास तिथि पर सर्पों को दूध पिलाने की भी परंपरा है।

आइए जानते हैं क्यों मनाई जाती है नागपंचमी और क्या हैं इससे जुड़ी खास बातें

नाग पंचमी का क्यों है विशेष महत्‍व
हिंदु धर्म में नाग को देवता का रूप माना जाता है और उनकी पूजा भी नाग पंचमी के दिन विधि- विधान से की जाती है। दरअसल, नाग को भगवान शिव शंकर के गले का हार और सृष्टि के पालनकर्ता हरि विष्णु की शैय्या माना जाता है। इसके अलावा नागो का लोगों के जीवन से भी नाता है। सावन के महीने में हमेशा जमकर बारिश होती है और इस वजह से नाग जमीन से निकलकर बाहर आ जाते हैं। माना जाता है कि नाग देवता को दूध पिलाया जाए और उनकी पूजा की जाए तो वो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यही नहीं ज्योतिशों के अनुसार कुंडली दोष दूर करने के लिए भी नाग पंचमी का अत्यधिक महत्व है।

आज पूजा करने पर कुंडली से हट जाता है कालसर्प दोष
धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी के दिन नागदेवता की पूजा करने से कुंडली के राहु और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं। सांप के डर और सर्पदंश से मुक्ति पाने के लिए नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग की पूजा भी करवाई जाती है, इस दिन महिलाएं सर्प को भाई मानकर उसकी पूजा करती हैं और भाई से अपने परिजनों की रक्षा का आशीर्वाद मांगती हैं।

इन पूजन सामग्रियों से करें नाग देवता की पूजा
नाग चित्र या मिट्टी की सर्प मूर्ति, लकड़ी की चौकी, जल, पुष्प, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, चीनी का पंचामृत, लड्डू और मालपुए, सूत्र, हरिद्रा, चूर्ण, कुमकुम, सिंदूर, बेलपत्र, आभूषण, पुष्प माला, धूप-दीप, ऋतु फल, पान का पत्ता दूध, कुशा, गंध, धान, लावा, गाय का गोबर, घी, खीर और फल आदि की जरूरत पूजा के लिए होती है।

गुप्त धन की रक्षा
शास्त्रों में ऐसा माना जाता है कि नाग देव गुप्त धन की रक्षा करते हैं इस कारण ये मान्याता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से जीवन में धन-समृद्धि का भी आगमन होता है। इस दिन व्रती को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष होता है तो उसे इस दोष से बचने के लिए नाग पंचमी का व्रत करना चाहिए।