शराब के आदी थे कोरोना से मृत कांस्टेबल, इलाज में नहीं बरती गयी कोई लापरवाही, जांच समिति ने सौंपी डीएम को रिपोर्ट

वाराणसी। 29 जुलाई की शाम कोरोना संक्रमित कांस्टेबल मनोज कुमार पांडये की मौत होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। कांस्टेबल की मौत में चिकित्सकीय लापरवाही बरतने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने एक तीन सदस्य टीम कांस्टेबल की मौत की जांच के लिए घोषित की थी। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ बीएन सिंह के नेतृत्व वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।

इस रिपोर्ट के अनुसार मृत कांस्टेबल शराब के आदि थे। इसके अलावा डायबटीज़ और है ब्लडप्रेशर के पुराने मरीज़ थे। उनका पहले दीन दयाल अस्पताल और फिर बीएचयू अस्पताल में भीतर इलाज किया गया, कहीं से कोई भी लापरवाही नहीं बरती गयी है।

जाँच समिति ने मरीज मनोज के पं दीन दयाल राजकीय चिकित्सालय, बीएचयू, पैथालाजी रिपोर्ट, इलाज करने वाले डाक्टरों का बयान, तथा बीएचयू से प्राप्त केस समरी व बीएचटी की जाॅच पडताल की। जांच अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के अनुसार मनोज को 23 जुलाई की शाम 8 बजकर 30 मिनट पर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय वाराणसी में कोविड पाजिटिव मरीज के रूप में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट के आधार पर समिति ने पाया कि मरीज उच्च रक्तचाप एवं डायबिटीज(शुगर) की बीमारी से ग्रस्त था तथा उनके द्वारा विगत 10 वर्षों से शराब का सेवन किया जा रहा था । मरीज को कोविड की निर्धारित दवायें यथा एजिथ्रोमाइसीन, विटामिन सी, विटामिन बी, पैरासीटामाल, ओमेप्राजोल दी गई थी।

उपचार के दौरान हर शिफ्ट में मरीज की नाडी, तामना, एसपीओटू लगातार किया जाता रहा। 28 जुलाई तक मरीज का एसपीओटू, तापमान, नाडी सामान्य रहा। कोविड के मरीजों में डायबिटीज एवं उच्च रक्तचाप रहने पर मरीज हाईरिस्क कैटेगरी में होता है तथा वह मल्टी आरगन फेल्योर में चले जाते हैं।

27 जुलाई को पैथालाजी रिपोर्ट में मरीज का टीएलसी, रेण्डम ग्लूकोज, सीरम यूरिया,सीरम किएटिव आदि बढे हुए थे जो 29 जुलाई को पैथालाजी रिपोर्ट में और बढे हुए पाये मिले । 27 जुलाई को मरीज पैथालाजी रिपोर्ट के अनुसार टीएलसी बढा हुआ। 29 जुलाई को मरीज की स्थिति बिगडने लगी तथा सांस की गति बढ गयी व सीने में के्रप्टस उत्पन्न हो गये जिसपर मरीज को इन्जेक्टेबल दवाइयां देते हुए तत्काल बीएचयू इलाज हेतु रेफर कर दिया गया ।

बीएचयू से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार दोपहर में मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो गयी जिस पर उसे आवश्यक दवा देते हुए वेंटिलेटर पर रख दिया गया। सायं 6.30 बजे मरीज का कार्डियोरेस्पिरैटरी अरेस्ट होने पर सीपीआर प्रारम्भ कर दिया गया परन्तु मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ एवं शाम 7 बजे मृत्यु हो गयी।

जाॅंच समिति ने निष्कर्ष में दिया है कि मनोज की मृत्यु की जाॅच में पाया गया कि वह डायबिटीज एवं उच्च रक्तचाप के पुराने मरीज थे और शराब के भी आदी थे। तथा दोनो अस्पतालों मे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप एवं कोरोना का इलाज किया गया । इसमें किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पायी गयी।