वाराणसी के सेंट्रल जेल में हर रोज क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को दी जाती है श्रद्धांजली, कल है ‘आजाद’ की जयंती

वाराणसी। महान क्रांतिकारी और देशभक्त चंद्रशेखर आजाद की जयंती 23 जुलाई को है। चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर तो सारा हिंदुस्तान इस क्रांतिकारी को याद करता है लेकिन वाराणसी में विशेष रुप से शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल परिसर में भारत माता के अमर सपूत क्रांतिकारी को प्रतिदिन याद किया जाता है।

क्रांतिकारियों की जयंती पर सिर्फ एक दिन उन्हें याद कर श्रद्धांजली देने के लिए तो कई लोग आते हैं, पर वाराणसी के संट्रल जेल में स्थित क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर हर रोज मान सम्मान के साथ माल्यार्पण कर उन्हें याद कर श्रद्धांजली दी जाती है। सेंट्रल जेल वही जगह है जहां चंद्रशेखर आजाद को ब्रिटिश शासन में सजा के तौर पर बेत मारे गए थें।

चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में शिक्षा ग्रहण करने के लिए बनारस आये थें और यहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की। यहां उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और ‘जेल’ को उनका निवास बताया।

उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, ‘वंदे मातरम्’ और ‘महात्मा गांधी की जय’ का स्वर बुलंद किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए। वर्तमान में शिवपुर स्थित जेल में आज भी वह जगह मौजूद है जहां चंद्रशेखर आजाद को बेंत मारने की सजा दी गई थी।

जेल से आने के बाद उनके बहादूरी के चर्चे पुरे काशी में होने लगें। लहुराबीर क्षेत्र में उनके नाम पर आजाद पार्क है तो वहीं सेंट्रल जेल के बाहर उनकी प्रतिमा और जेल के भीतर उस स्थान पर शिलापट्ट के साथ उनकी तस्वीर हैं जहां आजादी के लिए उन्होंने कोड़े खाये थें।

File Photo
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