बूढ़ी आँखों को है बेटे से मिलने का इंतज़ार, जेल में बंद बेटे की रिहाई के लिए दर-दर की खा रही ठोकर

वाराणसी। बनारस की पाण्डेयपुर की रहने वाली अमरावती देवी जिनका इकलौता बेटा महेंद्र वर्मा 3 वर्षों से नेपाल के नवल परासी जेल में बंद है। परिवार में महेंद्र व उसकी मां और एक पत्नी है। महेंद्र ही घर का खर्च चलाता था। अब वृद्ध मां भीख मांगने पर मजबूर हैं। बीएचयू के पूर्व छात्र यतीन्द्र पति पाण्डेय को इस बूढ़ी मां दुख और व्यथा का पता चला तो इन्होंने अक्टूबर 2019 में विदेश मंत्रालय दिल्ली से संपर्क कर महेंद्र वर्मा को राजनयिक मदद दिलाई। उसके बाद भारतीय दूतावास काठमांडू के आईपीएस अधिकारी केटी खंपा ने खुद नवल परासी जेल जाकर महेंद्र का हाल – चाल जाना व उनके मामले को समझा।

यतीन्द्र इस वृद्धा अमरावती देवी को लेकर नवम्बर 2019 में भारतीय दूतावास काठमांडू पहुंचे और आईपीएस अधिकारी केटी खम्पा से बात की तो उन्होने बताया कि महेंद्र वर्मा एक मोटर वाहन दुर्घटना मामले में नवलपुर जिला न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु और दूसरे को गंभीर चोट लगी। वह 11 जनवरी, 2017 से चार साल की जेल की सजा काट रहे हैं है। नेपाल के कानून के अनुसार यदि मृतक व घायल व्यक्ति के परिजनों को 5 लाख और 2.5 लाख नेपाली रुपए दे दिए गए होते तो अब तक महेंद्र वर्मा जेल से रिहा हो जाता।

सजा पूरी होने के बाद भी अगर जुर्माने की रकम नहीं दी गई तो महेंद्र को आजीवन जेल में ही रहना पड़ेगा। वृद्धा मां का कहना है कि दुर्घटना किसी और गाड़ी ने कि और मेरा बेटा उस जगह होने के कारण पकड़ा गया। बेसहारा गरीब मां के पास इतने पैसे नहीं हैं कि ये अपने बेटे को छुड़ा सकें और 80 वर्ष की अवस्था में कोई कार्य कर इतना पैसा जुटाना संभव नहीं है। भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद महेंद्र वर्मा के खान-पान का उचित प्रबंध कर दिया गया है।

मार्च 2020 में यतीन्द्र वृद्धा अमरावती देवी को लेकर वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से मिले और उनसे आर्थिक मदद का अनुरोध किया, लेकिन उसके बाद ही शहर में कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी जिसके कारण लॉकडाउन हो गया तबसे ये वृद्धा मजबूरन भीख मांगने में भी असमर्थ हो गई है। अब इस वृद्धा मां के सामने अपने बेटे को छुड़ाने से बड़ी चुनौती अपने आपको, बहु को कोरोना संक्रमण से बचाए रखने की है लेकिन ये भी संभव नहीं है क्योंकि घर में खाने के लाले पड़े हैं।

वृद्धा अमरावती देवी जानती हैं कि उनके न रहने पर उनका बेटा कभी नहीं घर आ सकता है। महेंद्र के परिवार में वृद्ध मां और पत्नी है जो अक्सर बीमार रहती है विवाह के छह महीने बाद ही जिसका पति जेल में हो और 4 साल से पति के रिहाई की प्रतीक्षा कर रही हो वो भला ठीक कैसे रह सकती है। यतीन्द्र का कहना है कि लाकडॉउन होने के कारण मैं अभी तक इनके बेटे को छुड़ा नहीं सका हूं और अभी भारत नेपाल सीमा बंद है।

वहीं महेंद्र की पत्नी सोनी देवी ने बताया कि पिकअप की किश्त अभी तक जमा नहीं हुई है। गाड़ी नेपाल में जब्त है, उसपर से कोरोना और लॉकडाउन ने स्थित और बिगाड़ दी है। पत्नी की एक ही प्रार्थना है कि कोई उनके पति को छोड़ाकर ले आये। उन्होंने कहा अब बस सरकार या किसी संस्था से उम्मीद की राह बची है।

बूढ़ी मां को प्रधानमंत्री मोदी से ही उम्मीद है कि उनकी पहल से बेटे की रिहाई हो सकती है। वृद्धा मां की बस यही लालसा है कि जीते जी अपने बेटे को वापस अपने पास ले आये और देख लें।