वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं ने मनायी तीन तलाक से आज़ादी की वर्षगाँठ

• महिलाओं ने कहा आजादी के एक साल पूरे हुये।
• तीन तलाक में आयी कमी।
• महिला कचहरी में तलाक के अब कम आते हैं केस।
• तीन तलाक के डर से आजाद हुयी मुस्लिम महिलायें।
• महिला कचहरी में नरेन्द्र मोदी और इन्द्रेश कुमार के लिये गाये गए बधाई गीत।
• नरेन्द्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को जीने का अधिकार दिया।
• कानून बनाने के लिये पीएम को दिया धन्यवाद।
• काशी से ही शुरू हुआ था तीन तलाक के खिलाफ आन्दोलन

वाराणसी। सैकड़ों वर्षों से तीन तलाक जैसी कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आजादी दिलाने वाले कानून को बने एक साल पूरे हो गये। कानून बनने के एक साल पूरे होने पर मुस्लिम महिलाओं ने मुस्लिम महिला फाउण्डेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में सुभाष भवन, इन्द्रेश नगर, लमही में महिला कचहरी लगायी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं आरएसएस के नेता इन्द्रेश कुमार के लिये बधाई गीत गाये।

इस अवसर पर मुस्लिम महिला फाउण्डेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को आजादी दो महापुरूषों की वजह से मिली है। तीन तलाक के डर से किसी भी मुस्लिम महिला ने अपने पतियों के कुकृत्यों का विरोध नहीं किया और वे अपनी बीबियों को डरा कर दो-तीन शादियां करते रहे। आज परिस्थिति बदल चुकी है, मुस्लिम महिलाओं के पास कानून का अधिकार है। तीन तलाक कानून आने के बाद तलाक देने की घटनाओं में कमी आयी है। अब मुस्लिम महिलाएं खुलकर सांस ले रही हैं और बिना डरे अपना घर चला रही हैं।

विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष डा० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि तीन तलाक की खौफ से आजाद मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी में बहुत परिवर्तन आया है। अब निकाह होने के बाद मुस्लिम बेटियां निश्चिन्त होकर जीवन यापन कर रही हैं और यदि तलाक हो भी जाए तो वे अपना हर्जा-खर्चा लेने के लिये कानून का दरवाजा खटखटा सकती हैं। सती प्रथा, विधवा विवाह के बाद तीन तलाक पर प्रतिबंध ऐतिहासिक घटना है और समाज सुधार के इतिहास में इस घटना को हमेशा प्रमुखता दी जायेगी।

बता दें कि मुस्लिम महिला फाउण्डेशन के तत्वावधान में सबसे पहले 1 दिसम्बर 2013 को वाराणसी से 500 मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के खिलाफ बिगुल फूंका था। तीन तलाक के खिलाफ बोलना तब शरीयत के खिलाफ बोलने जैसा माना जाता था। इस्लामिक कट्टपंथियों की डर की वजह से किसी की हिम्मत नहीं थी कि कोई तीन तलाक के खिलाफ बोल सके। मुस्लिम मर्दों की मनमानी की शिकार मुस्लिम महिलायें इस डर से जीती थीं कि कहीं उनका शौहर उन्हें किसी बात पर तीन बार तलाक देकर घर से बाहर न निकाल दे।

मुस्लिम महिला फाउण्डेशन ने तीन तलाक की बढ़ती घटनाओं को देखते हुये घर टूटने से बचाने के लिये विशाल भारत संस्थान के साथ मिलकर महिला कचहरी शुरू किया ताकि इन घटनाओं को सुलह समझौते के द्वारा रोका जा सके, लेकिन कानून के अभाव में मुस्लिम धर्मगुरूओं के प्रभाव में आकर मुस्लिम मर्द अपनी बीबियों को तलाक दे देते थे।

इस महिला कचहरी में नजमा परवीन, सोनी बानो, शहनाज, रूकसाना बानो, नाजमा, नगीना बानो, अर्चन भारतवंशी, डा मृदुला जायसवाल, सुनीता श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, सरोद देवी, गीता, इली, खुशी, उजाला, शिखा, राधा आदि महिलाओं ने भाग लिया।

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