शनिवार के दिन इस पूजा विधि से शनि देव को करे प्रसन्न, जाने व्रथ कथा

वाराणसी। शनिवार का दिन शनि देव का माना जाता है। इस दिन शनिदेव की खास तरह से पूजा करने पर व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते है। वहीं जिन लोगों पर शनि की वक्र दृष्टि पडी रहती है वह भी खत्म हो जाती है। माना जाता है कि शनि दोष से मुक्ति के लिए मूल नक्षत्र युक्त शनिवार से आरंभ करके सात शनिवार तक शनिदेव की पूजा करने के साथ साथ व्रत रखना चाहिए।

मान्यता है कि जो भी जातक शनि से जुड़े दान और उनके मंत्रों का जाप करता है, उसे बढ़ते कर्ज से मुक्ति पाने में मदद मिलती है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है साथ ही बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है यहीं नहीं शनिदेव की पूजा से साढ़ेसाती के प्रकोप से भी निजात मिलती है।

शनि उपासकों के अनुसार सूर्यपुत्र शनिदेव न्याय के देवता हैं। जिस भी जातक की कुंडली में पितृदोष या कालसर्प दोष होता है तो उस जातक के जीवन में सदैव परेशानियां बनी रहती है, उनके जीवन में कभी कुछ ठीक नहीं चलता ऐसे लोगों के परिवार में अक्सर वाद-विवाद बना रहता है। जिस भी जातक पर शनि की वक्र दृष्टि पड़ जाती है, उसे लंबी बीमारी की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों के हर कार्य में विलम्ब और रुकावट आती है, नौकरी के जुड़े रास्ते में कठिनाई आती है साथ ही ऐसे जातकों को जीवन में अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। शनिदेव की पूजा अगर विधि-विधान से की जाए तो तुरंत फलदायी होता है।

पितृदोष या कालसर्प दोष को ऐसे करे खत्म
शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए लोहे का छल्ला सबसे मददगार साबित होता है। चलिए अब आपको बताते हैं आखिर क्यों शनि के प्रकोप से बचने के लिए लोहे का छल्ला मददगार होता है। शनिदेव का अधिपत्य लौह धातु पर है इसलिए लोहे का छल्ला शनि देव की शक्तियों को नियंत्रित करने के काम आता है, मान्यता है कि लोहे से बना छल्ला शनि की पीड़ा को काफी हद तक कम कर देता है। लोहे का छल्ला बनवाते समय एक बात का ध्यान दें लोहे के छल्ले को आग में ना तपाये।

छल्ला धारण करने से पहले रखे इन बातों का ध्यान
लोहे के छल्ले को शनिवार के अलावा किसी भी दिन लाए। छल्ले को शनिवार की सुबह सरसों के तेल में डुबोकर रख दें शाम को इसे निकाल कर जल से धोकर शुद्ध कर लें। उसके बाद ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप के बाद इसे मध्यमा उंगली में धारण कर लें। ऐसा करने से शनिदेव की पीड़ा का असर कम होने लगता है।

क्यों चढ़ाते हैं तेल
माना जाता है कि रावण अपने अहंकार में चूर था और उसने अपने बल से सभी ग्रहों को बंदी बना लिया था। जब रावण शनिदेव को कैद कर लंका ले गया था। तब क्रोधित होकर हनुमानजी ने पूरी लंका जला दी थी, जिसके चलते सभी ग्रह आजाद हो गए शनि के दर्द को शांत करने के लिए हुनमान जी ने उनके शरीर पर तेल से मालिश की थी और शनि को दर्द से मुक्त‍ किया था उसी समय शनि ने कहा था कि जो भी भक्त श्रद्धा भक्ति से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसे सारी समस्‍याओं से मुक्ति मिलेगी। तभी से शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई थी।