वाराणसी में कोरोना काल में भी स्वास्थ्य सेवाओं का लचर हाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बेड पर लेटी हैं दो प्रसूता

वाराणसी। कोरोना वैश्विक महामारी को देखते हुए सभी जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है। खासकर बुज़ुर्ग और बच्चों को घर से न निकलने की सलाह दी जा रही है और नवजात बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति बार बार सभी को सजग किया जा रहा है। ऐसे में वाराणसी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी कई जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है, लेकिन जनपद के हरहुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से वायरल हुए एक वीडियों ने जिला प्रशासन के जागरूकता अभियान पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इस समय महिला वार्ड में डिलेवरी के बाद एक बेड पर ही दो महिलाओं को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। इसी बेड पर महिलाओं के परिजन भी बैठे हुए हैं पर किसी भी स्वास्थ्य कर्मी या अस्पताल कर्मी ने उन्हें बाहर जाने को नहीं कहा।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी बहन को लेकर एडमिट हुई सुशीला देवी ने बताया कि कल हम यहां आये हैं। हम तीन लोग घर से आये हैं। हम लोग एक ही बेड पर हैं। इसके अलावा यहां डिलेवरी के बाद एक ही बेड पर दो महिलाएं बच्चों के साथ लेटाई गयी हैं। कोरोना महामारी है उसके बाद भी लापरवाही की जा रही है।

सुशीला ने आरोप लगाते हुए बताया कि इसके अलावा मुझसे डिलेवरी के लिए 1 हज़ार रुपया भी माँगा गया। हमारे पास 700 रुपये थे। हमने देने चाहे तो नर्स बोली की इससे काम नहीं चलेगा एक हज़ार लाओ।

जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण इलाके की गर्भवती महिलाओं को 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्र की महिलाओं एक हजार रुपये दिए जाते हैं, जबकि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उन्हें पांच हजार रुपये और मिलते हैं। उसके बावजूद यह आरोप प्रशासनिक शिथिलता दर्शा रहे हैं।